Thursday, March 21, 2013

सुरेंद्र मेहता/हमारे प्रतिनिधि
यमुनानगर, 20 मार्च। कहावत है सरकार के अगाड़ी और घोड़े के पिछाड़ी नहीं जाना चाहिए, लेकिन यही जुर्रत यमुनानगर निवासी एक आम आदमी सुरेश कुमार सैनी कर बैठा और अब यमुनानगर शहर में कानून व्यवस्था के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डïा को पत्र लिखने के एवज में उसे लेने के देने पड़ रहे हैं। पुलिस ने पूरे परिवार को मुकदमों में फंसा दिया है। भादंसं की धारा 186, 294, 332 व 353 के तहत दर्ज मामले में चार नाबालिग बच्चे-बच्चियां भी शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब मानव अधिकार आयोग को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा है। उधर, डीएसपी फूल कुमार का कहना है कि सुरेश सैनी अपने खिलाफ दर्ज मामले को रफा-दफा करवाने के लिए पुलिस पर दबाव बनाने के लिए ऐसी शिकायतें कर रहा है जबकि हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हुआ।
सुरेश कुमार सैनी द्वारा मानव अधिकार आयोग को लिखी शिकायत में कहा है कि उसने 31 जनवरी, 2012 व 11 फरवरी 2012 में प्रदेश के सीएम को यमुनानगर जिला में बढ़ रहे अपराधों के संबंध में अखबारों की कटिंग लगाकर जानकारी भेजी थी। मुख्यमंत्री ने पुलिस से जवाब मांगा तो डीएसपी मुख्यालय ने जांच के बाद रिपोर्ट मुख्यमंत्री सचिवालय को भेजनी थी। लेकिन इस शिकायत पर सुरेश कुमार सैनी से पुलिस प्रशासन बुरी तरह से खफा हो गया। सुरेश कुमार सैनी का आरोप है कि उसे कार्यालय में बुलाकर धमकाया गया और कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए। लगे हाथ उसे धमकी दी गयी कि सीएम को पुलिस की शिकायत उसे महंगी पड़ेगी। जिस इंस्पेक्टर की सुरेश कुमार सैनी ने आरटीआई में जानकारी मांगी थी, उसी को संबंधित थाने में लगा दिया और यहीं से उसने सुरेश कुमार सैनी की ‘क्लास लगानीÓ शुरू कर दी। आरोप है कि कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवा कर जांच को रफा दफा करके दबा दिया गया। इसके बाद इस परिवार पर पुलिस का कहर टूटना शुरू हो गया। रात को 11 बजे पुलिस की दस गाडिय़ों में कथित तौर पर पुलिस उसके घर पहुंची और सुरेश कुमार सैनी को पुलिस थाने में लाकर उसकी डीएसपी और इंस्पेक्टर द्वारा जमकर पिटाई की गई। पुलिस थाने में उसका मुंह पानी में डुबोकर उसे बुरी तरह से टार्चर किया गया। कानों पर थप्पड़ मुक्के मारने से सुरेश कुमार सैनी को सुनना बंद हो गया। अब वह गरीबी के कारण उपचार नहीं करवा सकता। सुरेश कुमार सैनी का कहना है कि वह कांग्रेस पार्टी का कार्यकत्र्ता है। उसे नहीं मालूम था कि मुख्यमंत्री को कानून-व्यवस्था की सही जानकारी देने पर उसे इतनी बड़ी सजा मिलेगी।
सुरेश कुमार सैनी का आरोप है कि उसे व उसकी लड़कियों पर गांजा, चरस, अफीम व आम्र्स एक्ट के झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां मिल रहीं हैं। इन धमकियों को देने में पुलिस का एक मुखबिर भी शामिल है जो अकसर पुलिस थाने में ही बैठा रहता है। अब मानव अधिकार आयोग ने 6 मार्च को हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को आदेश जारी किए कि सुरेश कुमार परिवार पर दर्ज मामले की जांच किसी दूसरे जिले के अधिकारी से करवाई जाए। मानव अधिकार आयोग के आदेश के बाद बुधवार को डीएसपी कैथल ने यमुनानगर आकर मामले की जांच की है। सुरेश कुमार सैनी का परिवार इतना दहशत में है कि उसे अपने बयान दर्ज करवाने के लिए जब पुलिस थाने में बुलाया गया तो उसे कहा कि पुलिस की जगह छोड़कर किसी भी सार्वजनिक जगह पर बयान देने को तैयार हूं। इसके बाद डीएसपी कैथल ने उसके यहां जाकर ही बयान दर्ज किए हैं। मानव अधिकार आयोग ने 28 मार्च को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
उधर, डीएसपी फूल कुमार ने बताया कि सुरेश सैनी ने अमन चैन खराब होने व अपराध की घटनाओं में वृद्धि की शिकायत दी थी। जिस पर जब उसे बातचीत के लिए बुलाया गया तो उसने कहा कि मैंने तो समाचार पत्रों की कटिंग को देखकर यह शिकायत की है। इसके बाद इस शिकायत की जांच कर रिपोर्ट दे दी गई थी। बाद में सुरेश ने फोन कर शिकायत देकर पुलिस को बुलाया। पुलिस कर्मचारी जब उसके घर गये तो घर के लोग पुलिस कर्मियों पर टूट पड़े। उक्त लोगों ने न केवल पुलिस कर्मचारी की वर्दी फाड़ दी बल्कि मारपीट भी की और सरकारी काम में बाधा पहुंचाई। यही मामला उक्त परिवार के खिलाफ दर्ज किया गया है जिसकी सुरेश व उसके परिजनों ने अदालत से जमानत करवा ली थी। अब यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता अकसर शराब पीकर मोहल्ले में शांति भंग करता है और इसकी कई बार शिकायतें भी पुलिस को मिली हैं।

No comments:

Post a Comment