Sunday, March 11, 2012

holika dehan


एंकर ... हरियाणा के यमुनानगर में लोगो द्वारा होली की पूर्वसंदया पर होलीके दहन किया इस से पहले विधि पूर्व पूजा की गयी .  होलिका दहन गोधूलि बेला में  शाम को आठ बजे  किया गया . होलिका-दहनवैदिक काल में इस होली के पर्व को नवान्नेष्टि यज्ञ कहा जाता था। पुराणों के अनुसार ऐसी भी मान्यता है कि जब भगवान शंकर ने अपनी क्रोधाग्नि से कामदेव को भस्म कर दिया था, तभी से होली का प्रचलन हु‌आ। महलाओ और पुरशो ने होलिका दहन से पूर्व  लोटा जल, माला, रोली, चावल, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल फसल के धान्यों जैसे- पके चने की बालियां व गेंहूं की बालियां भी सामग्री के रुप में रखी और पूजा की

वीओ..१... विधिवत रुप से होलिका का पूजन करने के बाद होलिका का दहन किया जाता है. होलिका दहन सदैव भद्रा समय के बाद ही किया जाता है. 


वर्षो पूर्व पृथ्वी पर एक अत्याचारीराजा हिरण्यकश्यपुराज करता था। उसने अपनी प्रजा को यह आदेश दिया कि कोई भी व्यक्ति ईश्वर की वंदना न करे, बल्कि उसे ही अपना आराध्य माने। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद ईश्वर का परम भक्त था। उसने अपने पिता की आज्ञा की अवहेलना कर अपनी ईश-भक्ति जारी रखी। इसलिए हिरण्यकश्यपुने अपने पुत्र को दंड देने की ठान ली। उसने अपनी बहन होलिका की गोद में प्रह्लाद को बिठा दिया और उन दोनों को अग्नि के हवाले कर दिया।
दरअसल, होलिका को ईश्वर से यह वरदान मिला था कि उसे अग्नि कभी नहीं जला पाएगी। लेकिन दुराचारी का साथ देने के कारण होलिका भस्म हो गई और सदाचारी प्रह्लादबच निकले। उसी समय से हम समाज की बुराइयों को जलाने के लिए होलिकादहन मनाते आ रहे हैं।


बाईट... जतिंदर  शर्मा . श्रदालु


वीओ..२...  सार्वजनिक रूप से होलिकादहन मनाते हैं। इसके पीछे एक संदेश छिपा हुआ है। दरअसल, हम आसुरी वृत्तियोंको मृत मानव (होलिका) का रूप देकर जलाते हैं। हम सभी जानते हैं कि मृत व्यक्ति को हमेशा घर से दूर जलाया जाता है। और इसमें कई व्यक्ति भी शामिल होते हैं।  इस दौरान पूरी रात्रि तक पवित्र कार्य शुरू करने से परहेज किया जाता है। इसलिए होलिकादहन को कभी घर में संपन्न नहीं किया जा सकता है।  हिंदू रीति-रिवाज में घर के पुरु षही मृतक का दाह-संस्कार करते हैं। वास्तव में, इस दौरान घर की स्त्रियों का सम्मिलित होना वर्जित है। ठीक उसी प्रकार होलिकादहन में स्त्रियों का शामिल होना निषिद्ध होता है। यदि हम होलिकादहन को अपने घर में अंजाम देते हैं, तो इसे अपशकुन माना जाता है। इसलिए रात्रि में स्त्रियों को केवल ईश्वर का मंत्र-जाप ही करना चाहिए।


बाईट...शकुन्तला रानी


वीओ..३ ..सूखे घास-पत्ते, उपले, बांस की कमानियांआदि से होलिका का पुतला बना कर इसके चारों तरफ लकडियां डाली गयी  और एक बांस-स्तंभ भी बनाया गया । होलिका जलने के दौरान लोगों द्वारा अग्नि के चारों तरफ परिक्रमा की गयी ।कहा जाता है की  इस दौरान अग्नि देवता से अपनी गलत वृत्तियोंके लिए क्षमा मांगते हैं और उनसे आग्रह करते हैं कि वे हमारी सभी बुराइयों का नाश करें। अग्नि की पूजा हम होलिकादहन में अग्नि की पूजा इसलिए करते हैं, क्योंकि अग्नि को परमात्मा का स्वरूप माना जाता है। इनकी वंदना से हमें दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति मिलती है। यह सच है कि यदि हम होलिकादहन के सही अर्थो को समझें, तो संपूर्ण विश्व में आतंकवाद जैसी समस्या ही न रहे! क्योंकि यह समस्या मुख्य रूप से बुरी भावना, यानी दुर्भावना की ही देन है। इसलिए आइए होलिकादहन के अवसर पर अग्निदेवसे यह प्रार्थना करें कि हम सभी बैर-भाव भूल जाएं और प्रेम पूर्वक होली खेलें।

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