Wednesday, December 22, 2010

नोकरी न मिलने से लगायी फांसी

नोकरी न मिलने से लगायी फांसी



जगाधरी। आहलुवाला गांव में नौ·री न मिलने से परेशान ए· युव· ने मंगलवार रात ·ो गांव ·े नजदी· आम ·े बाग में फांसी लगा ली। सूचना मिलने ·े बाद सदर पुलिस जगाधरी ने घटना स्थल पर पहुंच ·र स्थिति ·ा जायजा लिया। बुधवार ·ो जगाधरी सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम ·े बाद शव परिजनों ·ो सौंप दिया।
पुलिस से मिली जान·ारी ·े अनुसार गांव आहलुवाला निवासी रवि·ांत (२२) बी-·ॉम पास था। जब उसे ·ाफी समय त· नौ·री नहीं मिली, तो वह मानसि· रूप से परेशान रहने लगा। हालां·ि परिजनों ने उस·ा अंबाला ·े ए· निजी अस्पताल में ईलाज भी ·रवाया था। पुलिस ·े मुताबि· मंगलवार रात ·ो खाना खाने ·े बाद रवि·ांत अचान· घर से गायब हो गया। जब परिजनों ·ो इस·े बारे में पता चला, तो उन्होंने रिश्तेदारियों व अन्य जगहों पर तलाश शुरू ·र दी। परिजन सारी रात उसे खोजते रहे। ले·िन उस·ा ·हीं ·ुछ पता नहीं चला। बुधवार सुबह ग्रामीणों ने उस·ा शव गांव ·े नजदी· आम ·े बाद में पेड़ से लट·ा देखा तथा इस·ी सूचना परिजनों ·ो दी। सूचना मिलने ·े बाद परिजन मौ·े पर पहुंच गए। परिजनों ने पुलिस ·ो सूचित ·िया। सूचना मिलने ·े बाद सदर थाना प्रभारी सुरेंद्र ·ुमार पुलिस बल ·े साथ घटना स्थल पर पहुंचे। मामले ·ी गंभीरता ·े मद्देनजर फोरेंसि· टीम ·ो मौ·े पर बुलाया गया। पुलिस ने शव ·ो नीचे उतारा तथा जगाधरी ·े सर·ारी अस्पताल में पोस्टमार्टम ·े बाद शव परिजनों ·ो सौंप दिया।

बुधवार सुबह ग्रामीणों ने उस·ा शव गांव ·े नजदी· आम ·े बाद में पेड़ से लट·ा देखा

Friday, December 17, 2010

आओ गाठी पाईये

आज के समय में ये गाठी पाने वाला खेल यदा कदा ही दिखता है। कुछ वर्षों पहले तक बच्‍चे गाठी, गुल्‍ली-डंडा, पतंगबाजी, पकड़मकपड़ाई, लोहा-लक्‍कड़, छुपन-छुपाई, भागमभाग मतलब चैन बनाकर पकड़ना आदि खेल खेला करते थे। पर इन सभी खेलों पर टीवी के कार्टून्‍स ज्‍यादा हावी  हो गये हैं और बच्‍चे क्रिकेट के दीवाने ज्‍यादा होते जा रहे हैं।

Tuesday, December 14, 2010

राख से परेशान हो रहे लोगों ने लगाया जाम

यमुनानगर। लंबे अरसे से स्टार्च मिल ·ी राख से परेशान हो रहे लोगों ने मंगलवार ·ो रादौर मार्ग पर जाम लगा दिया और जम·र नारेबाजी ·ी। लोगों ने ·रीब ए· घंटे त· जाम लगाए रखा। जिसे खुलवाने ·े लिए पुलिस ·ो ·ाफी मशक्कत ·रनी पड़ी। लोग स्टार्च मिल ·ी राख पर प्रतिबंध व प्रबंध·ों पर ·ार्रवाई ·ी मांग ·र रहे थे। बाद में पुलिस अधि·ारियों ·े स्टार्च मिल प्रबंध·ों से बातचीत ·रने ·ा आश्वासन दे·र जाम खुलवाया।
हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल (एमएम) ·े प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र मित्तल ·े नेतृत्व में संत नगर सहित अन्य ·ालोनियों ·े सै·ड़ों लोग स्टार्च मिल ·े गेट पर ए·त्रित हो गए। लोग इतने ·्रोधित थे ·ि वे नारेबाजी ·रने लगे और मिल प्रबंध·ों पर ·ार्रवाई ·ी मांग ·रने लगे। महेंद्र मित्तल, राम ·ुमार, संदीप, हरीश, राम सिंह, अर्जुन, सोनू, विक्की ·ा ·हना था ·ि जब से यहां स्टार्च मिल स्थापित हुई है उन लोगों ·ा जीना दुर्भर हो गया है। मिल ·ी राख ने उन·ो परेशान ·र·े रख दिया है। उन·ा आरोप है ·ि दिन-रात मिल ·ी राख घरों में गिरती रहती है। अब सर्दी इतनी पड़ रही है और वे धूप में नहीं बैठ स·ते। घर से बाहर बैठते ही राख उन पर गिरनी शुरू हो जाती है। छत पर ·पड़े सुखाने जाते हैं तो वे राख से मैले हो जाते हैं। ·ाई सामान अगर गलती से घर ·े बाहर रह जाता है तो उस पर राख ·ी मोटी परत जम जाती है। आंगन में उगे पौधों ·ा राख ·ी वजह से वि·ास नहीं हो रहा। लोगों ·ा ·हना है ·ि राख ·ी वजह से वे बीमार रहे हैं। बच्चे हर समय ·िसी न ·िसी बीमारी से ग्रस्त रहते हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही है लोगों में सांस ·ी बीमारी घेर रही है। उन·ी आंखों में एलर्जी होने लगी है। आंखों ·ो हाथ से मलते ही वे लाल हो जाती है।

लोगों ने आरोप लगाया ·ि मिल में ·ोयले ·ी जगह गोबर ·े उपलों ·ा प्रयोग ·िए जाते हैं। जिससे राख ज्यादा उड़ती है। हवा ·े साथ यह राख ·े ·ण घरों में आ गिरते हैं। इससे पहले भी लोग ·ई बार मिल प्रबंध·ों ·े खिलाफ नारेबाजी व जाम लगा चु·े हैं मगर प्रशासन ने आज त· उन्हें ·ार्रवाई ·रने ·ा सिर्फ आश्वासन ही दिया। इसी ·े विरोध स्वरूप लोगों ने रादौर मार्ग पर जाम लगा दिया। सूचना मिलते ही थाना शहर यमुनानगर प्रभारी पुलिस बल ·े साथ मौ·े पर पहुंचे और बातचीत ·ा आश्वासन दे·र जाम खुलवाया।

Sunday, December 12, 2010

फाईनल में लुधियाना ने पटियाला ·ो १-० से हराया

बल्लारपुर फुटबाल स्टेडियम में चल रहे फुटबाल टूर्नामेंट में रविवार ·ो फाईनल मैच सतलुज क्लब लुधियाना और दलबीर ए·डमी पटियाला ·े मध्य खेला गया। जिसमें सतलुज क्लब लुधियाना ने दलबीर ए·ाडमी पटियाला ·ो १-० से हरा·र बिल्ट ·प पर ·ब्जा ·िया।

फाईनल में पहुंची दोनों ही टीमें पंजाब से थी इसलिए दोनों ए· दूसरे ·े खेल से वा·िफ थी। लुधियाना टीम ·े रणजीत सिंह जिन्होंने सेमीफाईनल मैच में देहरादून टीम ·े खिलाफ हैट्रि· लगाई थी वे आज ·े मैच भी छाए रहे। दोनों ही टीमों ने बहुत ही आ·्राम· रूख अपनाया। परंतु मध्यांतर त· ·ोई भी टीम गोल नहीं ·र स·ी। मैच ·े ६५वें मिनट में गोविंदा संधु जो ·ि पूरे टूर्नामेंट में अपनी थ्रो ·ी वजह से चर्चा में रहे गोविंदा ·ी लंबी थ्रो पर लुधियाना ·े रमनदीप ने गोल ·र·े लुधियाना ·ी टीम ·ो जीत ·े नजदी· ला दिया। मैच·े रैफरी रवि ·ुमार थे। मैच में बराबर उतार चढ़ाव बना रहा। लुधियाना ने १-० से जीत ·र बिल्ट ·प पर ·ब्जा ·र लिया।
टूर्नामेंट ·े बेस्ट स्·ोरर सतलूज क्लब लुधियाना ·े रणजीत सिंह रहे। जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल ·िए। उन्हें जेसीटी फेबरिक्स ·ी तरफ से पुरस्·ृत ·िया गया। मु य अतिथि मु य महाप्रबंध· बल्लारपुर इंडस्ट्रीज अजय गुप्ता थे। दोनों यूनियनों ·े प्रधान नरेंद्र त्यागी तथा दुर्गा प्रसाद मिश्रा, पारसनाथ मिश्रा, स्पोर्टस ·मेटी ·े सदस्य त्रिलो·ी नाथ, बालेश्वर सिंह, रा·ेश ·ुमार, संीप चौधरी, सतीश दुबे, दिपाल सर·ार, गुनदुन मिश्रा सहित अन्य उपस्थित थे।

Saturday, December 11, 2010

बाढ़ पीडि़त किसानों को मुआवजा 28 व 37 रुपये

बाढ़ आने पर सरकार द्वारा तरह-तरह के वादे मुआवजा देने को लेकर किए जाते हैं, जिस पर पीडित लोगों को भी आस बंध जाती हैं कि मुआवजा मिलने पर उनके कुछ जख्म तो भरेंगे लेकिन जब मुआवजा 28 रुपये या 37 रुपये मिले तो जख्मों पर नमक छिड़कने का ही मुहावरा सिद्ध होता है। ऐसा ही हो रहा है यमुनानगर जिला के बाढ़ पीडि़तों के साथ जो 2008 में आई बाढ़ के बाद से मुआवजे का इंतजार कर रहे थे। बाढ़ की मुआवजा राशि मिलने की जैसे ही यहां के किसानों को जानकारी मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा लेकिन यह खुशी उस समय काफूर हो गई, जब उन्हें मुआवजे की राशि एक मजाक लगी।

यहां यह उल्लेखनीय है कि 2008 में आई बाढ़ के कारण लोगों को भारी नुकसान हुआ था लेकिन उसका मुआवजा प्राप्त करने के लिए पीडि़त किसान बार-बार सरकार से आग्रह कर रहे थे। किसानों के अनुसार सरकार ने 2008 में मुआवजे के रूप में प्रति एकड़ फसल के नष्टï होने पर पांच हजार रुपए तय किए थे। अब जब मुआवजे की राशि मिलनी आरम्भ हुई तो उनके पैरों तले से जमीन ही खिसक गई। यमुनानगर हलके के मंडी गांव की ही अगर बात की जाए तो किसी भी पीडि़त को 500 रुपये मुआवजा नहीं मिला होगा। गांव के मुरसलीम को 28 रुपए, इरफान को 28 रुपए 25 पैसे, सतरूद्ïदीन को 93 रुपए 75 पैसे, असलम को 37 रुपए, महबूब हसन को 412 रुपए, इकराम को 84 रुपए 50 पैसे, मुस्तफा 450 रुपए, जुल्फान 84 रुपए 25 पैसे, इस्लाम 337 रुपए 50 पैसे, अमजद खान 327 रुपए 50 पैसे, जमीला 262 रुपए 50 पैसे, सुदरलाल 75 रुपए, आलम हसन, तालब हसन सलीम हसन 56 रुपए 25 पैसे, नाथीराम भगवत प्रसाद 112 रुपए 50 पैसे मिले। इसी प्रकार गांव लाकडमय प्रतापपुर में नरेश कुमार को 83 रुपए, जयपाल को 84 रुपए, गुरमेज 37 रुपए मिले। गांव नवाजपुर में चंपादेवी 122 रुपए, बालादेवी 123 रुपए, रवीश कुमार 123 रुपए, मेनपाल 180 रुपए, मुकेश कुमार 181 रुपए विनोद कुमार को 180 रुपए मिले।
इन किसानों का कहना है कि हम यह नहीं समझ पाये कि सरकार ने हमें यह मुआवजा राशि दी है या हमें याद करवाया है कि सन्ï 2008 में भी बाढ़ आई थी। लेकिन एक बात पर ये किसान सरकार का इस बात पर आभार व्यक्त करते दिखाई दिए कि एक हजार से कम राशि वाले किसानों से रसीदी टिकट पर अंगूठा-दस्तखत करवाकर यह राशि प्रदान कर दी। अगर यह रकम चैक से दी जाती तो इसके लिए एकाउंट खुलवाना पड़ता और बैंक के चक्कर लगाने पड़ते।
किसानों का कहना है कि सरकार अगर हमें यह धनराशि नहीं भी देती तो अच्छा होता। हम अब तक यह नहीं समझ पाए कि सरकार द्वारा घोषित पांच हजार रुपए एकड़ के हिसाब से हमें क्या मिलना चाहिए था और जो हमें मिला वह तो ऊंट के मुंह में जीरा भी नहीं। उधर, राजस्व अधिकारियों का कहना है कि एक एकड़ के जितने मालिक हैं उन सभी में धनराशि बराबर-बराबर बांटी गई।
वहीं इनेलो के वरिष्ठ नेता एवं विधायक अभय सिंह चौटाला यमुनानगर विधायक दिलबाग सिंह ने सरकार द्वारा इस प्रकार मुआवजा दिए जाने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सरकार का किसान विरोधी होने का इससे बड़ा और क्या सबूत होगा कि 2008 में आई बाढ़ की मुआवजा राशि अब दी जा रही है और वह भी मात्र 28 रुपये।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को राहत तो दे नहीं सकती लेकिन उसे किसानों के जले पर नमक भी नहीं छिड़कना चाहिए। उन्होंने मांग की कि हरियाणा के विभिन्न जिलों में विगत माह आई बाढ़ का मुआवजा पीडि़तों को तुरन्त प्रभाव से दिया जाए। उधर, किसान नेता सतपाल कौशिक का कहना है कि किसानों में बांटा गया मुआवजा किसानो के साथ मजाक है। सरकार को चाहिए कि वह किसानों को राहत दे कि उनका मजाक उड़ाए।
जले पर नमक

Friday, December 10, 2010

बाढ ·ा गम भूले तो मुआवजा राशि ने ज म ताजा ·र दिए?

यमुनानगर 10 दिसंबर- यमुना नदी ·े आस पास ·े गांवों में यहां ·े सें·डों ·िसान हर वर्ष बाढ ·ी त्रासदी झेलने ·ी ए· आदत सी बना बैठे हैं और इसे अपनी ·िस्मत मान·र आगे ·ी जिंदगी शुरू ·र देते हैं। ले·िन सर·ार द्वारा जब मुआवजा राशि ·ी घोषणा ·ी जाती हेै तो ए· उ मीद और बंधती है। सन्ï 2008 में आई बाढ ·ी मुआवजा राशि मिलने ·ी जैसे ही यहां ·े ·िसानों ·ो जब जान·री मिली तो और भी खुशी ·ा ठि·ाना नहीं रहा। ले·िन यह खुशी उस समय ·ाफूर हो गई जब उन्हें मुआवजे ·ी राशि ए· मजा· लगी।

·िसानों ·े अनुसार सर·ार ने 2008 में मुआवजे ·े लिए पांच हजार रूपए तय ·िए थे। जो ·िसान अपना दिन खराब ·र·े धनराशि ले·र लौट रहे थे। उनमें मंडी गांव ·े इरफान ·ो 28 रूपए 25 पैसे,मुरसलीम ·ो 28 रूपए,सतरूद्ïदीन ·ो 93 रूपए 75 पैसे,असलम ·ो 37 रूपए,महबूब हसन ·ो 412 रूपए,इ·राम ·ो 84 रूपए 50 पैसे,मुस्तफा 450 रूपए,जुल्फान 84 रूपए 25 पैसे,इस्लाम 337 रूपए 50 पैसे,अमजद खान 327 रूपए 50 पैसे,जमीला 262 रूपए 50 पैसे,सुदरलाल 75 रूपए,आलम हसन, तालब हसन व सलीम हसन 56 रूपए 25 पैसे, नाथीराम व भगवत प्रसाद 112 रूपए 50 पैसे मिले। इसी प्र·ार गांव ला·डमेप्रतापुर में नरेश ·ुमार 83 रूपए, जयपाल 84 रूपए,गुरमेज 37 रूपए। गांव नवाजपुर में चंपादेवी 122 रूपए,बालादेवी 123 रूपए,रवीश ·ुमार 123 रूपए, मेनपाल 180 रूपए,मु·ेश ·ुमार 181 रूपए व विनोद ·ुमार ·ो 180 रूपए मिले।
इन ·िसानों ·ा ·हना है ·ि हम यह नहीं समझ पाए ·ि सर·ार ने हमें यह मुआवजा राशि दी है या हमें याद ·रवाया है ·ि सन्ï 2008 में भी बाढ आई थी। ले·िन ए· बात पर ये ·िसान सर·ार ·ा इस बात पर आभार व्यक्त ·रते दिखाई दिए ·ि ए· हजार से ·म राशि वाले ·िसानों से रसीदी टि·ट पर अंगूठा दस्तखत ·रवा·र यह राशि प्रदान ·र दी। अगर यह र·म चै· से दी जाती तो इस·े लिए ए·ांउन्ट खुलवाना पडता और बैं· ·े चक्·र लगाने पडते। ·िसानों ·ा ·हना है ·ि सर·ार अगर हमें यह धनराशि नहीं भी देती तो अच्छा होता। हम अब त· यह नहीं समझ पाए ·ि सर·ार द्वारा घोषित पांच हजार रूपए ए·ड ·े हिसाब से हमें क्या मिलना चाहिए था और जो हमें मिला वह तो ऊंट ·े मुंह में जीरा भी नहीं।  उधर राजस्व अधि·ारियों ·ा ·हना है ·ि ए· ए·ड ·े जितने मालि· हैं उन सभी में धनराशि बराबर बराबर बांटी गई